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दशहरा के दिन नीलकंठ के दर्शन करना अत्यंत शुभ कार्य होता है

#नीलकंठ

#निलपंख

 

 

देवाधिदेव महादेव के प्रतिनिधि की उपाधि प्राप्त नीलकंठ पक्षी तेजी से विलुप्त हो रहे हैं… इन्हें विशेष पर्वो, खास कर विजयादशमी पर देखना शुभ माना जाता है… पहले राजा – रंक सभी इसका दर्शन कर खुशी महसूस करते थे पर अब यह खूबसूरत पक्षी लुप्त होने की कगार पर है…ग्रामीण व शहर, कहीं भी नहीं दिखायी दे रहे..इसी कारण इण्टरनेशनल यूनियन फार नेचर कन्जर्वेशन आफ नेचर (यूसीएन) ने नीलकंठ को रेल लिस्ट में शामिल कर लिया है, यानी तेजी से विलुप्त हो रहा जीव….।

 

हिन्दू धर्म में मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने नीलकंठ पक्षी के दर्शन के बाद रावण को मारा था…तभी से नीलकंठ का दर्शन शुभ माना जाने लगा…।

 

धर्मशास्त्रों में शिव को नीलकंठ कहा गया है। इसी से इस पक्षी को धरती पर भगवान शिव का प्रतिनिधि माना गया है… इसके पीछे तर्क यह दिया जाता है कि रंग-बिरंगे इस खूबसूरत पक्षी का गला भी शिव की तरह नीला होता है….नीलकंठ पक्षी को वन्य जीव विशेषज्ञ इण्डियन रोलर बर्ड या ब्लू जे कहते हैं… यह भारतीय पक्षी है…।

 

किसानों का मित्र

नीलकंठ शुभ होने के साथ-साथ किसानों का मित्र भी है… यह सही मायने में किसानों के भाग्य की रक्षा करता है… दरअसल फसल को हानि पहुंचाने वाले कीड़ों को यह खाता है और फसल की रखवाली करता है…।

 

शिकारी पक्षी

नीलकंठ एकांकी स्वभाव का पक्षी है… अकेले रहना पसंद करता है.. पंख पर गहरी नीली धारी से यह पहचाना जाता है… पंख नीला, पीठ का हिस्सा भूरा और चोंच नुकीली होती है.. इसी कारण कोई भी पक्षी इसके आसपास नहीं ठहरता है…

इसका मुख्य आहार खेतों में फसल को नष्ट करने वाले कीड़े-मकोड़े, चूहे, कनखजूरे, बिच्छू, कीट-पतंग व फल हैं…।

 

कीटनाशक से मर रहे नीलकंठ

वन्य जीव प्रभाग सोहगीबरवा के एसडीओ पी.के. सिंह के अनुसार नीलकंठ दुर्लभ प्रजाति का संरक्षित पक्षी है…फसलों में प्रयोग होने वाले कीटनाशक दवाओं से नीलकंठ पक्षी की न सिर्फ प्रजनन क्षमता घटी वरन असमय इनकी मौत होने लगी..जलवायु परिवर्तन भी नीलकंठ पक्षी के विलुप्त होने का बड़ा कारण है.. कीटनाशक दवाओं से कीड़े मरे औेर कीड़ों को खाकर नीलकंठ मर रहे हैं… अवैध कटान से फलदार वृक्षों की घटती संख्या भी इस पक्षी के लुप्त होने का कारण है… भोजन की कमी से ज्यादातर नीलकंठ पक्षी असमय काल के गाल में समा गए…

विलुप्त हो रहे नीलकंठ पक्षी को बचाने के लिए शासन ने प्रयास तेज कर दिए हैं…पर इसका हल तभी निकलेगा जब हम रासायनिक खेती को छोड़ प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ेगे,बरगद पीपल के पेड़ों की संख्या बढ़ाएंगे…।।

पटेरा

K.D.jain के साथ जिला प्रभारी विजय यादव की रिपोर्ट

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