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ओबीसी महासभा का संघर्ष लाया रंग, नीट में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण बहाल

 

अब 1 से 15 अगस्त तक जातिगत जनगणना के लिए चलाया जाएगा सदस्यता अभियान

बैतूल। नीट में ओबीसी रिजर्वेशन लागू होने का मसला काफी समय से लटका था। इसकी मांग लंबे समय से ओबीसी महासभा द्वारा की जा रही थी। ओबीसी महासभा ने नीट मे 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण बहाल करने पर प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए इसी तरह ओबीसी की जातिगत जनगणना कराये जाने की मांग की।
इस संबंध में शनिवार को ओबीसी महासभा के जिला अध्यक्ष राजू नरेश मालवीय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि ओबीसी महासभा द्वारा मध्यप्रदेश (भोपाल) में पिछड़ा वर्ग के साथ हुए अन्याय एवं पिछड़ावर्ग की जातिगत जनगणना न कराए जाने के विरोध में 11 सूत्रीय मांगों को लेकर 28 जुलाई 2021 को आंदोलन किया गया। देश भर से सभी शिक्षित, शोषित, वंचित, मजदूर, किसान, बेरोजगार, जातीय, सामाजिक एवं पिछड़ावर्ग संगठन, जनप्रतिनिधि के दबाव के चलते देश के प्रधानमंत्री द्वारा ओबीसी को नीट में 27 प्रतिशत आरक्षण बहाल किया गया।
–70 साल से की जा रही जातिगत जनगणना की मांग–
जिलाध्यक्ष श्री मालवीय ने बताया ओबीसी महासभा द्वारा विगत 70 सालों से पिछड़े वर्ग (ओबीसी समाज) की जातिगत जनगणना की जा रही है। जिससे पिछड़े वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में सड़क से लेकर सदन तक प्रतिनिधित्व मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नीट में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया नीट के लिए आंदोलनरत ओबीसी महासभा प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करती है।
–लाठीचार्ज का किया विरोध–
ओबीसी महासभा के तत्वाधान में 28 जुलाई को 11 सूत्रीय मांगों को लेकर भोपाल में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया गया, आंदोलन के दौरान सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा महिलाओं एवं युवाओं पर लाठी चार्ज किया गया। ओबीसी महासभा ने कहा इस प्रकार का अमानवीय कृत्य घोर निंदनीय है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जिस प्रकार से पिछड़ावर्ग आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई, मंडीदीप से आने वाली बसों को अधिक संख्या में रोका गया जबकि संविधान के अनुच्छेद 19 के अभिव्यति की स्वतंत्रता के रूप देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार है। आंदोलन में सम्मिलित होने आए समर्थकों को इस प्रकार रोका जाना सरकार की ओबीसी समाज के प्रति निर्दयी, दमनकारी, तानाशाह और रूढ़तावादी, अन्यायबादी मानसिकता को दर्शाता है। इसके साथ ही ओबीसी महासभा ने 28 जुलाई 2021 को आंदोलन में सम्मिलित एवं समर्थक 200 से अधिक जातीय, सामाजिक एवं राजनैतिक एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग के संयुक्त संगठनों का भी आभार व्यक्त किया।
–किसी भी दल ने नहीं होने दी जातिगत जनगणना–
महासभा के कार्यकर्ताओं का कहना है ओबीसी महासभा के तत्वाधान में हुए आंदोलन से प्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार और मुख्यविपक्षी दल कांग्रेस समाज को वोट बैंक के रूप में आगामी विधानसभा, उपचुनाव एवं पंचायत चुनाव में लाभ के लिए पिछड़ावर्ग हितैषी साबित करने की राजनीति से पीछे नहीं हटेंगे। ओबीसी महासभा द्वारा जातिगत-जनगणना के मुद्दे को उठाती रही है जबकि आजादी के 70 सालों में केंद्र में भाजपा और कांग्रेस दोनों की सरकार रही है। लेकिन पिछड़ावर्ग की जातिगत जनगणना दोनो दलों में से किसी ने नहीं होने दी है।
–1 से 15 अगस्त तक चलाया जाएगा सदस्यता अभियान–
ओबीसी महासभा द्वारा 1 अगस्त से 15 अगस्त तक सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। संभागीय अध्यक्ष नवील वर्मा, जिलाध्यक्ष राजू नरेश मालवीय, जिला महामंत्री आशीष उघड़े, बैतूल नगर अध्यक्ष मनोज मालवीय बहुजन मुक्ति मोर्चा के संभाग प्रभारी बीएल मासोदकर ने इस अभियान में अधिक अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।

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